हाथीपांव ने कुचल दिए कई अरमान, राजेन्द्र ने साझा की दर्द की हर बात

10 वर्षों से हैं फाइलेरिया रोग से है ग्रसित

● लोगों को देते हैं साफ़- सफाई अपनाने का सन्देश

रोहतास पत्रिका/सासाराम:

जन स्वास्थ्य से जुड़ी अनेकों ऐसी बीमारियां है जिसका उपचार समय रहते ना किया जाए तो बीमारी लोगों के लिए बोझ बन जाती है। उन्हीं में से एक है बीमारी है एलीफेंटिटिस यानी हाथीपांव। क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों से काटने पर होने वाले इस फाइलेरिया रोग में लोगों के पांव हाथी के पांव के समान हो जाते हैं और यह बीमारी लोगों को लाचार कर देती है। सासाराम के करन सराय मोहल्ला निवासी 55 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद पिछले 10 वर्षों से इसी हाथीपांव बीमारी से ग्रसित है।

पेशे से बिजली मिस्त्री राजेंद्र प्रसाद ने अपना दर्द बयां करते हुए कहते हैं “पिछले 10 वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहा हूँ और काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 10 वर्ष पूर्व मेरे हाइड्रोसील में काफी वृद्धि हो गई थी, जिसका ऑपरेशन करवाने के बाद ठीक हो गया। परंतु ऑपरेशन के कुछ ही महीने बाद पैर फूलने लगे। पैर फूलता देख डॉक्टर से मुलाकात किया तो डॉक्टर ने इसे फाइलेरिया बीमारी बताया. डॉक्टरों ने जानकारी दी कि यह बीमारी एक प्रकार के मच्छरों के काटने से होता है’’। राजेन्द्र प्रसाद बताते हैं इस बीमारी को लेकर वह अनेकों अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अभी तक यह बीमारी ठीक नहीं हुई। हाथीपांव की पीड़ा को झेलते हुए अपने कामों को करना पड़ता है।

लोगों को दे रहे हैं स्वच्छता अपनाने का सन्देश:

राजेन्द्र आज अपनी इस बीमारी से जूझते हुए अब समुदाय में लोगों को स्वच्छता का सन्देश देकर जागरूक कर रहे हैं. लोगों को मच्छरों से उत्पन्न होने वाली इस बीमारी से आगाह करते हुए उन्हें अपने घर में व आसपास सफाई रखने के महत्त्व के बारे में बता रहे हैं.

सावधानी और सही जानकारी है बचाव:

वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ जयप्रकाश गौतम ने बताया हाथीपांव फाइलेरिया बीमारी के अंतर्गत आता है जो एक प्रकार के मच्छर के काटने से होता है। उन्होंने बताया की फाइलेरिया में हाइड्रोसिल का बढ़ना भी इस बीमारी के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा इस बीमारी से बचाव के लिए सही जानकारी और सावधानी जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया इस तरह की बीमारी के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष अभियान चलाया जाता है जिसमें लोगों के घरों तक जाकर दवा मुहैया करायी है। उन्होंने बताया फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है।

यह अभियान पिछले 28 सितंबर से चलाया जा रहा है जो 11 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। इस दौरान जिले में करीब 31 लाख लोगों को फाइलेरिया का दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया यह अभियान प्रत्येक वर्ष चलाया जाता है और कोरोनाकाल में फाइलेरिया का दवा खिलाने के दौरान कोविड-19 के दिशा निर्देशों का भी पालन किया जा रहा है। डॉ गौतम ने लोगों को सलाह दिया कि वह लोग साल में एक बार फाइलेरिया की दवा एल्बेंडाजोल और डीईसी का प्रयोग डॉक्टर सलाह पर जरूर खाएं.

इन बातों का रखे ख्याल:

● अपने पैर को साधारण साबुन व साफ पानी से रोज धोएं।
● मुलायम और साफ कपड़े से अपने पैर को साफ़ करें।
● पैर की सफाई करते समय ब्रश का प्रयोग न करें, इसे पैरों पर घाव हो सकते हैं।
● जितना हो सके अपने पैर को आरामदायक स्थिति में उठाए रखें।
● जितना हो सके उतना व्यायाम करें।

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