रोहतास: नक्सलियों का इलाका कहे जाने वाले रेहल गाँव में ‘मंजरी’ के प्रयास को मिली कामयाबी, आंगनबाड़ी पहुँचने लगे बच्चे

Sasaram Sevika Rehal gaon
-आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 64 की सेविका मंजरी

• मंजरी के अथक प्रयास से गांव के लोग अपने बच्चों को भेज रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र

रोहतास पत्रिका/सासाराम:

रोहतास जिला अंतर्गत नौहट्टा प्रखंड का रेहल गांव कभी नक्सलियों के लिए जाना जाता था। इस गाँव के लोग कभी शिक्षा से कोसों दूर हुआ करते परंतु अब इस गांव में भी शिक्षा की अलख जगने लगी है। रेहल गांव में शिक्षा की ज्योत जगाने मं आईसीडीएस विभाग ने अहम भूमिका निभाई है। आईसीडीएस विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 64 की सेविका मंजरी पिछले 12 वर्षों से रेहल गाँव में आंगनबाड़ी के माध्यम से शिक्षा और पोषण की ज्योत जगा रही हैं। साथ ही साथ गर्भवती महिलाओं एवं किशोरियों को सरकार द्वारा मिलने वाली सभी योजनाओं को उनके तक पहुंचा रही हैं। आईसीडीएस की वजह से सेविका मंजरी इस गाँव के नन्हे-मुन्ने बच्चों को कलम पकड़ना सिखा रही हैं।

शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति भी कर रही है जागरूक

सेविका मंजरी अपने गांव की गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ किशोर एवं किशोरियों को स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। साथ ही साथ किशोर तथा किशोरियों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व की भी जानकारी दे रही हैं और इसके इस्तेमाल पर भी बल दे रही हैं। महिलाओं को आयरन की गोली एवं पौष्टिक आहार उनतक पहुचाने में मदद कर रही हैं। सेविका मंजरी अपने कार्यों को पूरी ईमानदारी पूर्वक निर्वाह कर रही हैं। विभाग द्वारा जो भी दिशा निर्देश उन्हें प्राप्त होता है वह इस काम को बेहतर तरीके से करके विभाग को एक बेहतर परिणाम देती आ रही हैं।

गोदभराई व मुंहहजुठाई कार्यों को किया संपादित

मंजरी अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित होकर अपने कार्यों का निर्वाह बखूबी करती आ रहीं हैं। विभाग द्वारा संचालित गर्भवती महिलाओं की गोद भराई के साथ-साथ बच्चे के जन्म के 6 महीना बाद होने वाले मुंहजुठाई(अन्नप्राशन) कार्यक्रम को बखूबी अंजाम देती आ रही हैं। आज रेहल गांव में सेविका मंजरी के इस योगदान से वहां के लोग अपने बच्चों को आंगनबाड़ी में भेज रहे हैं और उन्हें शिक्षित कर रहे हैं। साथ ही साथ वहां के लोगों मंजरी की वजह से अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक हुए हैं।

विपरीत परिस्थितियों में विभाग की रही अहम भूमिका

जमीन तल से तकरीबन 2000 मीटर ऊंचाई पर कैमूर पर्वत पर स्थित रेहल गांव पहुँचने के लिए जमीन तल से तकरीबन 52 किलोमीटर पहाड़ का सफर तय करना पड़ता है। इस परिस्थिति में आईसीडीएस विभाग वहां की महिलाओं के साथ-साथ किशोर-किशोरियों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ देता आ रहा है। सीडीपीओ सीमा मिश्रा ने बताया कि सेविका मंजरी अपने कर्तव्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वाह कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सेविका मंजरी इस गांव में रह रहे लोगों के घर जाकर गर्भवती महिलाओं द्वारा बरतने वाली सावधानियां एवं उनको मिलने वाला पौष्टिक आहार के बारे में जानकारी देती हैं।