स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध भाषण चर्चा में, जानिए इस भाषण की महत्व बातें

रोहतास पत्रिका/डेस्क:


12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनायी जाती है। 11 सितंबर,1893 को स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्म संसद में एक प्रसिद्ध भाषण दिया था जिसमें उन्होंने पूरब के बारे में पश्चिम को बताया था, यानी उन्होंने दुनिया को भारत की संस्कृति के बारे में बताया था। जो भाषण काफ़ी प्रसिद्ध हुआ था। 128 साल बाद भी उनका यह भाषण युवा दिलों में जोश भर देता है।

उनके प्रसिद्ध भाषण के कुछ अंशों पर आइए नज़र डालते है:

1. इस भाषण की शुरुआत उन्होंने अमेरिका के भाइयों और बहनों से की थी। उन्होंने अपने जोरदार और स्नेह से भरे स्वागत पर अपना हर्ष प्रकट किया।


2. इसके बाद उन्होंने सभी धर्मों की जननी, सभी जाति और संप्रदाय के लाखों करोड़ों हिंदुओं की तरफ से धन्यवाद किया और आभार व्यक्त किया।


3. उन्होंने आगे कहा कि- “मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं।”


4. उन्होंने अपने देश के प्रति गर्व महसूस करते हुए कहा कि मैं उस देश का निवासी है जिस देश ने इज़रायलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थानों को रोमन हमलावरों ने तोड़कर खंडहर बना दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने महान पारसी लोगों को भी शरण दी जिन्हें वे आज भी पाल-पोस रहे हैं।


5. उन्होंने अपने बचपन में स्मरण की गई कुछ पंक्तियों को दोहराया था:

“रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम् ।
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव”।।
“ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः”।।

6. उन्होंने आगे कहा कि सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इसके भयानक वंशजों ने धरती को हिंसा से भर दिया है। और कई बार धरती खून से लाल हुई है, सभ्यताओं का विनाश और न जाने कितने देशों का विनाश हुआ है। अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते तो आज हमारा मानव समाज ज़्यादा उन्नत होता। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि आज का यह सम्मेलन हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हो या कलम से, सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा। 

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