रोहतास: TB जागरूकता अभियान ने बदली ‘संजीत’ की जिंदगी, अब लोगो को कर रहे है जागरूक

tb patient sanjeet sasaram
रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड अंतर्गत सेमरा गांव निवासी संजीत कुमार सिंह।

रोहतास पत्रिका/सासाराम:

मजदूरी कर के अपना व अपने परिवार का पालन पोषण ऐसे ही कठिन था और उसपर 2016 में जब 32 वर्षीय संजीत कुमार सिंह को मालूम हुआ कि वह टीबी जैसी बीमारी से पीड़ित है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने आस- पास के लोगों एवं संबंधियों से सुन रखा था कि टीबी एक लाइलाज व जानलेवा बीमारी है। इलाज है भी तो वह बहुत महंगा है जो सिर्फ निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है।

एक गरीब परिवार से संबंध रखने के कारण वह इस स्थिति में नहीं थे कि वह अपना ईलाज किसी महंगे निजी अस्पताल में करवा पाते। जिसके कारण संजीत पूरी तरह से हताश महसूस करने लगे। उनके एक पड़ोसी मित्र ने स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलाए जा रहे टीबी जागरूकता अभियान के बारे में बताया तो संजीत ने सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने का विचार किया। सरकारी अस्पताल में अपना ईलाज कराने के बाद आज वह पूर्णता स्वस्थ हो चुके हैं। इससे टीबी के ईलाज को लेकर सिर्फ़ उनकी सोच ही नहीं बदली है, बल्कि अब वह आम लोगों को टीबी पर जागरूक भी कर रहे हैं। 

मित्र के सहयोग से हुए जागरूक

संजीत कुमार सिंह रोहतास जिला अंतर्गत शिवसागर प्रखंड के सेमरा गांव के रहने वाले हैं। टीबी की पुष्टि होने के बाद वह संशय में थे कि सरकारी अस्पताल में टीबी का सम्पूर्ण ईलाज संभव होगा या नहीं। लेकिन उनके एक पड़ोसी मित्र जिला यक्ष्मा विभाग द्वारा पर चलाए जा रहे टीबी जागरूकता अभियान से पूर्व में ही परिचित थे। जब उन्हें इस बात की जानकारी हुयी कि संजीत टीबी से ग्रसित हैं एवं पैसों के आभाव के कारण अपना ईलाज नहीं करवा पा रहे हैं, तब उन्होंने संजीत को सरकारी अस्पताल में जाकर संपर्क करने की सलाह दी।

अपने मित्र की सलाह मानकर संजीत कुमार ने सरकारी अस्पताल में एक बार इलाज करवाने की सोची। इसी सोच ने आज संजीत की जिंदगी बदल दी। संजीत बताते हैं जब उन्हें मालूम चला कि सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज होता है तो वह तुरंत सासाराम सदर अस्पताल पहुंचे और इसकी जानकारी ली। चिकित्सकों से सम्पर्क करने के बाद उनके भीतर का यह डर पहले खत्म हुआ कि टीबी एक लाईलाज बीमारी है। उन्होंने बताया चिकित्सकों ने उन्हें आश्वस्त किया कि यदि नियमित तौर पर दवा का सेवन करने से टीबी को आसानी से हराया जा सकता है। 

बेहतर परामर्श से संजीत हुए प्रभावित

सासाराम सदर अस्पताल में पहुंचने के बाद यक्ष्मा विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने संजीत को टीबी के विषय में विस्तार से जानकारी दी और उन्हें विश्वास दिलाया कि टीबी का इलाज पूरी तरह से संभव है। साथ ही सरकार द्वारा टीबी मरीजों को दिए जाने वाली सुविधाओं के बारे में भी उन्हें बताया। विभागीय स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर परामर्श से प्रभावित होकर संजीत ने अपना इलाज शुरू करवाया और आज संजीत कुमार टीबी बीमारी को मात दे चुके है। आज वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है और शिवसागर प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले दो सालों से सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी कर रहे हैं।

अन्य लोगों को कर रहें है जागरूक

सासाराम सदर अस्पताल के उपचार से ठीक हो चुके संजीत कुमार सिंह अब अपने प्रखंड के अलावा जिले के अन्य लोगों को भी जागरूक करने में जुटे हुए हैं। अपने ड्यूटी के बाद संजीत कभी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ तो कभी स्वयं टीबी से संक्रमित लोगों को जागरूक करते हैं। साथ ही तकरीबन दर्जनों लोगों को संजीत अस्पताल पहुंचाकर टीबी की जांच करवा चुके हैं। संजीत बताते हैं उन्हें बहुत सारे ऐसे लोग मिले जो टीबी से संक्रमित थे परंतु डर या लोक लज्जा की वजह से वह लोग नहीं बताते थें कि उन्हें टीबी है। संजीत ने बताया जब उन्हें ऐसे लोगों के बारे में मालूम चलता है तो वह उन लोगों की अपनी कहानी बता कर उन्हें करते हैं। साथ ही उन लोगों को अस्पताल पहुंचा कर उनका इलाज भी करवाते हैं।